लाहौर में जन्मी वीना मैनी ने , प्रारम्भिक शिक्षा कटनी मध्यप्रदेश में व स्नाकोत्तर शिक्षा जबलपुर विश्वविद्यालय से प्राप्त की।एम् एड में विश्व विद्यालीय स्वर्ण -पदक प्राप्त किया। प्रारम्भ से ही भरत -naatyam नृत्य व नाटकों में गहन अभिरुचि होने से ढेरों ईनाम जीते।नैशनल कैडेट कोर में सीनियर मोस्ट अंडर आफीसर बनीं व मध्य प्रदेश को आल इंडिया में रीप्रसेंट किया।वहाँ बेस्ट कैडेट का खिताब जीता। विवाहोपरांत वीना विज बनी,व १९८३ से दूरदर्शन व आकाशवाणी जालंधर से जुड़ गईँ। कटनी में बाड्सले स्कूल एवं जालंधर में एपीजे स्कूल में भी कुछ समय के लिए अध्यापन कार्य किया।
सन् २००० तक ढेरों नाटकों ,टेली - फिल्मों , धारावाहिकों व कई पंजाबी फिल्मों में भी अभिनय किया। स्टार-प्लस व लिश्कारा चैनलों पर भी स्टार बेस्ट सैलर और ५२ किश्तों का धारावाहिक 'वापसी' किया।
यूं एस में अब वर्ष का आधा समय रहने के कारण सब छोड़ना पडा।
साहित्य की सेवा- स्वरूप कालेज के समय से ही कालेज- पत्रिका व समाचार- पत्रों में कवितायेँ लिखतीं रहीं। रंगमंच, आकाशवाणी व दूरदर्शन के साथ- साथ लेखन - कार्य भी चलता रहा। पंजाबी संस्कृति को सीखने का मौका मिलता रहा। आकाशवाणी जालंधर से अपनी आवाज में कविता- पाठ भी कई बार किया। सन् २००३ में ह्यूस्टन टेक्सास (यूं,एस) में कवि-सम्मेलन में वाहा-वाही मिली।
कादम्बिनी, समय-सुरभि (बिहार) , डैमोक्रेटिक वर्ल्ड एवं पंजाब केसरी (पंजाब )जगमग दीप ज्योति (राज स्थान) , देवदूत (महाराष्ट्र ) , दैनिक भास्कर (पं ,चंडीगढ़ ) इसके अलावा अंतर्जाल पर भी अभिव्यक्ति और अनुभूति (दुबई) , साहित्य कुञ्ज (कैनेडा ) , ई-कविता (न्यूयार्क ) , कृत्या (त्रिवेन्द्रम ) में भी इनकी कवितायेँ व कहानियाँ यदा- कदा पढी जा सकतीं हैं।
सन् १९९९ में प्रथम काव्य संग्रह ' सन्नाटों के पहरेदार ' छपा।
सन् २००४ में प्रथम कहानी संग्रह 'पिघलती शिला ' आथार्स गिल्ड आफ इन्डिया के सहयोग से छपी।
वैब साईट --- .veenavij.com
ई-मेल ------
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment